बगीचे का घोंघा
वाह! या उई!
खुशी, आश्चर्य और दर्द दिखाने वाले शब्द सीखो।
जब हमें अचानक कुछ महसूस होता है — खुशी, आश्चर्य, डर या दर्द — तो मुँह से अपने-आप एक छोटा-सा शब्द निकल पड़ता है। ऐसे शब्द मन का भाव बताते हैं, और उनके बाद यह चिह्न लगता है: ! (विस्मयादिबोधक चिह्न)।
तुम्हारी किताब 'वीणा' के पाठ 2 'बगीचे का घोंघा' में घोंघा दो ऐसे शब्द बोलता है। बाहर की नई-नई चीज़ें देखकर वह खुश और हैरान होकर बार-बार 'वाह!' कहता है — जैसे बड़ा मैदान देखकर, या बड़ का विशाल पेड़ देखकर।
पर जब खड़-खड़ की आवाज़ के साथ एक सूखा पत्ता उसके ऊपर आ गिरा, तो उसे लगा कि पूरा आकाश ढँक गया है। वह डर के मारे ज़ोर से चिल्लाया — 'उई!' यहाँ उसने 'वाह!' नहीं कहा, क्योंकि उस पल वह खुश नहीं, डरा हुआ था।
तो याद रखो: 'वाह!' खुशी, आश्चर्य या तारीफ़ में बोलते हैं — जैसे किताब का उदाहरण: वाह! कितना सुंदर फूल है। 'उई!' डर या दर्द में बोलते हैं — जैसे: उई! मेरी उँगली में काँटा चुभ गया।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.