आसमान गिरा
कहानी: आसमान गिरा
कहानी 'आसमान गिरा' पढ़ो और एक डरे हुए खरगोश से मिलो।
यह कहानी आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 5 'आसमान गिरा' की है। इसे यहाँ छोटे में पढ़ो और ध्यान रखो कि कौन-सा जानवर कब आया।
एक खरगोश पेड़ के नीचे सो रहा था। अचानक ज़ोर की आवाज़ आई — धम्म! खरगोश चौंककर जाग गया। उसने इधर-उधर देखा, पर उसे कुछ दिखाई नहीं दिया। उसे लगा कि आसमान गिर रहा है! वह डर गया और भागने लगा।
भागते-भागते सबसे पहले उसे एक लोमड़ी मिली। लोमड़ी ने पूछा कि कहाँ भागे जा रहे हो। खरगोश बोला — आसमान गिर रहा है, जल्दी भागो! तो लोमड़ी भी उसके साथ भागने लगी। आगे उन्हें एक भालू मिला। उसने भी पूछा, और आसमान की बात सुनकर भालू भी भागने लगा। फिर वे एक हाथी के पास से निकले। भालू ने हाथी को भी वही बात बताई, और हाथी भी भागने लगा।
अब सब एक लाइन में भाग रहे थे: सबसे आगे खरगोश, उसके पीछे लोमड़ी, उसके पीछे भालू, और सबसे पीछे हाथी। भागते-भागते उन्हें शेर मिला। हाथी ने शेर से कहा कि आसमान गिर रहा है, तुम भी भागो। पर शेर उनके साथ नहीं भागा। उसने दहाड़कर कहा — कहाँ गिर रहा है? रुको! सारे जानवर रुक गए। फिर शेर ने सबसे प्रश्न पूछा।
तो कहानी के पात्र इस क्रम में आते हैं: पहले खरगोश, फिर लोमड़ी, फिर भालू, फिर हाथी, और आखिर में शेर।
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