जयपुर से पत्र
पत्र: जयपुर से पत्र
अमर की चिट्ठी 'जयपुर से पत्र' पढ़ो।
आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 6 'जयपुर से पत्र' एक चिट्ठी है। इसे अमर ने जयपुर से अपने पिताजी को लिखा। अमर अपने अध्यापकों के साथ घूमने (सैर करने) जयपुर गया था। पत्र में वह बताता है कि उसने वहाँ क्या-क्या देखा। आओ, उसकी सैर को क्रम से देखें।
अमर लिखता है कि वे परसों रात सकुशल जयपुर पहुँच गए। कल सुबह नाश्ता करके सब जयपुर घूमने निकले। सबसे पहले उन्होंने हवामहल देखा। हवामहल के पास ही जंतर-मंतर है। यह एक वेधशाला है, जिसे राजा सवाई जयसिंह ने बनवाया था। वेधशाला वह जगह है जहाँ ग्रहों, तारों और नक्षत्रों को देखने के यंत्र रखे जाते हैं।
इसके बाद वे रामनिवास बाग गए। वहाँ एक अच्छा कला-संग्रहालय है। उसमें जयपुर के राजा-महाराजाओं के कपड़े, उनके अस्त्र-शस्त्र (हथियार) और उनके चित्र रखे हैं।
जयपुर से लगभग चौदह किलोमीटर दूर आमेर का दुर्ग (किला) है — बहुत पुराना और बहुत बड़ा। आमेर में शीशमहल देखने लायक है। शीशमहल के पास ही शिला देवी का मंदिर है। मंदिर में दर्शन करके वे नगर लौट आए। रात को उन्होंने राजस्थान के लोकनृत्य देखे और राजस्थान का खास खाना दाल-बाटी चूरमा खाया।
पत्र के आखिर में अमर बताता है कि आज दोपहर के बाद वे झीलों के नगर उदयपुर जाएँगे, और अगला पत्र वहीं से लिखेगा।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.