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जयपुर से पत्र

पत्र के बारे में सही बातें

पत्र के बारे में सही बातें पहचानो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 6 में अमर का पत्र है। किसी पत्र को पढ़कर हम कई बातें जान सकते हैं: पत्र किसने लिखा, किसको लिखा, कहाँ से लिखा और कब लिखा।

किसने और किसको: पत्र के अंत में लिखा है 'आपका पुत्र अमर' — यानी पत्र अमर ने लिखा। पत्र 'पूज्य पिताजी' से शुरू होता है — यानी पत्र उसके पिताजी के लिए है। अंत में अमर माताजी को प्रणाम और अपनी बहन लता को प्यार भी भेजता है।

कहाँ से और कब: पत्र का नाम ही है 'जयपुर से पत्र'। अमर लिखता है कि वे परसों रात जयपुर पहुँचे और आज दोपहर के बाद उदयपुर जाएँगे। इसका मतलब है कि अमर की यात्रा अभी चल रही है — उसने पत्र यात्रा के बीच में लिखा, यात्रा खत्म होने के बाद नहीं।

अमर जयपुर सैर करने गया था। सैर (भ्रमण) का मतलब है घूमने-फिरने और नई जगहें देखने के लिए कहीं जाना — जैसे ताजमहल देखने आगरा जाना, या पूरे भारत को देखने 'भारत दर्शन' पर जाना। पर हर यात्रा सैर नहीं होती। बीमारी का इलाज कराने नगर जाना, या पढ़ाई करने शिलांग जाना — ये यात्राएँ ज़रूरी काम के लिए हैं, घूमने के लिए नहीं। इसलिए ये सैर नहीं हैं।

पत्र अमर ने जयपुर से, यात्रा के बीच में, अपने पिताजी को लिखा था; और सैर (भ्रमण) वह यात्रा है जो घूमने और नई जगहें देखने के लिए की जाए।

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