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जयपुर से पत्र

दाल-बाटी चूरमा

राजस्थान के खास खाने दाल-बाटी चूरमा के बारे में जानो।

अमर ने अपने पत्र में लिखा कि जयपुर में उसने राजस्थान का खास खाना दाल-बाटी चूरमा खाया। आपकी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 66-67 पर 'खान-पान' में इसके बारे में बताया गया है। दाल-बाटी चूरमा राजस्थान का पारंपरिक (बहुत पुराने समय से बनता आ रहा) व्यंजन है। इसमें तीन चीज़ें होती हैं: दाल, बाटी और चूरमा।

दाल — यह अरहर, मूँग, चने या मसूर की दाल से बनती है। इसे कई मसालों के साथ पकाते हैं, जिससे इसका स्वाद बढ़ जाता है। ऊपर से हरा धनिया डालने पर स्वाद और भी अच्छा हो जाता है।

बाटी — गेहूँ के आटे की गोल लोइयाँ बनाकर उन्हें उपलों और लकड़ियों की आग में सेंका जाता है। फिर गरम-गरम बाटियों को घी में डुबोकर परोसा जाता है। बाटियाँ बाहर से कुरकुरी और अंदर से मुलायम होती हैं। उपला (इसे गोइठा या कंडा भी कहते हैं) गाय या भैंस के गोबर से बना ईंधन है। गोबर को हाथ से आकार देकर धूप में सुखाकर उपला बनाया जाता है।

चूरमा — पहले बाटी या मोटी रोटी बनाई जाती है। फिर उसे ओखली में मूसल से कूटा जाता है। जब वह बारीक (चूरा) हो जाता है, तो उसमें घी, सूखे मेवे और बूरा मिलाया जाता है। बूरा गुड़ या चीनी जैसा मीठा पदार्थ है। इसलिए चूरमा मीठा होता है।

दाल-बाटी चूरमा राजस्थान का पारंपरिक व्यंजन है जिसमें तीन चीज़ें होती हैं: मसालेदार दाल, उपलों और लकड़ियों की आग में सेंककर घी में डुबोई बाटी, और कूटी हुई बाटी या रोटी में घी, सूखे मेवे और बूरा मिलाकर बना मीठा चूरमा।

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