जयपुर से पत्र
पत्र कैसे लिखें
पत्र लिखना सीखो।
आपकी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 69 पर 'पत्र कैसे लिखें?' में बताया गया है कि पत्र के कौन-कौन से भाग होते हैं और वे किस क्रम में आते हैं। आओ, इन्हें अमर के पत्र के साथ मिलाकर समझें।
1. प्रारंभ — सबसे पहले ऊपर दाईं ओर दिनांक (तारीख) लिखते हैं, ताकि पढ़ने वाले को पता चले कि पत्र कब लिखा गया। 2. संबोधन — जिसे पत्र लिख रहे हैं, उसे पुकारना, जैसे 'पूज्य पिताजी', 'आदरणीय माँ' या 'मेरे प्रिय मित्र'। अमर ने लिखा: पूज्य पिताजी। 3. अभिवादन — संबोधन के बाद नमस्ते, प्रणाम या आशीर्वाद जैसे शब्द। अमर ने लिखा: सादर प्रणाम!
4. आपकी बात — इसके बाद वह सब लिखो जो तुम कहना चाहते हो। अमर ने जयपुर की सैर के बारे में लिखा। 5. अंतिम पंक्ति — घर के बाकी लोगों का अभिवादन: बड़ों को प्रणाम, छोटों को प्यार। अमर ने लिखा: माताजी को मेरा प्रणाम और लता बहन को बहुत प्यार। 6. समापन — अंत में 'आपका प्यारा बेटा', 'आपकी प्यारी बेटी' या 'आपका प्रिय मित्र' और फिर अपना नाम। अमर ने लिखा: आपका पुत्र, अमर।
पत्र लिखने के बाद उसे लिफ़ाफ़े में डालना मत भूलना। लिफ़ाफ़े पर डाक टिकट चिपकाओ, और जिसे पत्र भेज रहे हो उसका पूरा पता पिनकोड के साथ साफ़ अक्षरों में लिखो।
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