LearnWave
Learn it. Master it.

नकली हीरे

चित्रकथा: नकली हीरे

चित्रकथा 'नकली हीरे' पढ़ो।

आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 7 'नकली हीरे' एक चित्रकथा है — यानी चित्रों में कही गई कहानी, जिसमें पात्रों की बातें चित्रों के साथ लिखी होती हैं। इसे नीरा बेनेगल ने लिखा है। आओ, इसका पहला हिस्सा पढ़ें।

काननपुर का राजा बुद्धिमान था और बूढ़ा (वृद्ध) भी। उसका एक ही बेटा था। राजा ने सोचा — मैं अब ज़्यादा दिन जीवित नहीं रहूँगा, इसलिए मुझे अपने बेटे के लिए एक सलाहकार ढूँढ़ना चाहिए। सलाहकार वह होता है जो सही सलाह दे और सही रास्ता बताए।

एक सुबह राजा ने सब दरबारियों को दरबार में बुलाया। उसने कहा — मैं आप सबसे एक प्रश्न पूछना चाहता हूँ, कृपा करके साफ़ उत्तर दीजिएगा। प्रश्न था: क्या मैं बुद्धिमान और ईमानदार राजा हूँ? सब दरबारियों ने बारी-बारी से एक ही उत्तर दिया — बिना किसी संदेह के महाराज, संसार में आप जैसा बुद्धिमान और ईमानदार राजा और कोई नहीं है!

राजा ने हर दरबारी को एक-एक हीरा दिया और उनके उत्तर के लिए धन्यवाद कहा। सब दरबारी खुश होकर चले गए। पर एक नवयुवक दरबारी चुपचाप एक कोने में खड़ा रहा। राजा ने पूछा — आप चुप क्यों हैं? आपका उत्तर क्या है?

नवयुवक बोला — महाराज, दूसरों ने तो आपको खुश करने वाले उत्तर दिए; पर क्षमा कीजिए, मेरा उत्तर वैसा नहीं है। राजा ने कहा कि फिर भी हम सुनना चाहते हैं। तब नवयुवक ने सच कहा — इसमें कोई संदेह नहीं कि आप बुद्धिमान और ईमानदार हैं; पर आपसे भी श्रेष्ठ राजा हो चुके हैं, जो बुद्धिमानी और ईमानदारी में आपसे बढ़कर थे।

कहानी में सब दरबारियों ने राजा को खुश करने के लिए कहा कि संसार में उन जैसा कोई नहीं, पर एक नवयुवक दरबारी ने सच कहा कि राजा बुद्धिमान और ईमानदार हैं, पर उनसे भी श्रेष्ठ राजा हो चुके हैं।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.