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ओणम के रंग

ओणम के बारे में

पाठ 'ओणम के रंग' पढ़ो और केरल के त्योहार ओणम के बारे में जानो।

आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 8 'ओणम के रंग' केरल के त्योहार ओणम के बारे में है। इसे के.के.सी. नायर ने लिखा है। आओ, पाठ से ओणम की खास बातें जानें।

ओणम कैसे शुरू होता है: सुबह-सुबह बच्चे नहा-धोकर, हाथ में टोकरी लेकर लाल, पीले और सफ़ेद फूल तोड़ने बाग-बगीचों में निकल पड़ते हैं। सूरज निकलते ही वे अपने घर के आँगन को गोबर से लीपते हैं और फिर आँगन में पूक्कलम बनाते हैं। पूक्कलम यानी फूलों की रंगोली। इसी के साथ केरल में ओणम का त्योहार शुरू हो जाता है।

ओणम खेतों की उपज से जुड़ा त्योहार है। पाठ बताता है कि इस समय तक किसान अपनी फ़सल (उपज) काट चुके होते हैं और खलिहानों में धान भरा होता है। बारिश के बादल छँट जाते हैं, और केरल की प्रकृति — समुद्र की चमकती लहरें, नारियल के लहराते पेड़, चहचहाते पक्षी, फूलों पर मँडराती तितलियाँ — मानो ओणम के स्वागत की तैयारी कर चुकी होती है।

ओणम कब आता है: श्रावण महीने के श्रावण नक्षत्र के दिन। उस दिन हर वर्ग के लोग अपनी चिंताएँ और दुख भूलकर खूब धूम-धाम से यह त्योहार मनाते हैं।

ओणम पर नौका-दौड़ भी होती है। केरल में एक जगह है — आरन्मुला। ओणम के त्योहार पर वहाँ नावों की प्रतियोगिता होती है, जिसे देखने हज़ारों लोग इकट्ठे होते हैं।

पाठ में, ओणम केरल का खेतों की उपज से जुड़ा त्योहार है, जो श्रावण महीने के श्रावण नक्षत्र के दिन आता है; यह आँगन में पूक्कलम (फूलों की रंगोली) बनाने से शुरू होता है, और आरन्मुला में इस पर नौका-दौड़ होती है।

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