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ओणम के रंग

महाबली की कथा

ओणम से जुड़ी राजा महाबली की कथा पढ़ो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 8 'ओणम के रंग' में बताया गया है कि ओणम का त्योहार एक पौराणिक कथा (बहुत पुराने समय से चली आ रही कथा) पर आधारित है। आओ, वह कथा क्रम से पढ़ें।

बहुत पहले महाबली नाम के एक राजा केरल पर राज करते थे। उनका राज्य पृथ्वी, स्वर्ग और पाताल लोक — तीनों तक फैला हुआ था। महाबली के राज में लोग पूरी तरह खुश थे।

एक दिन महाविष्णु वामन का रूप (बहुत छोटे कद वाला रूप) लेकर राजा महाबली के पास पहुँचे। उन्होंने महाबली से केवल तीन पग (कदम) भूमि माँगी। महाबली को यह छोटा-सा दान लगा, और उन्होंने तुरंत हाँ कर दी।

तभी महाविष्णु ने अपना वामन रूप छोड़ दिया और त्रिविक्रम बनकर इतने बड़े हो गए कि पूरे ब्रह्मांड तक फैल गए। उन्होंने दो ही पगों में स्वर्ग, भूमि और पाताल — सब नाप लिया। अब तीसरा पग रखने के लिए कोई जगह नहीं बची। महाविष्णु ने प्रश्न भरी नज़र से महाबली की ओर देखा, तो महाबली ने तीसरा पग रखने के लिए अपना सिर झुका दिया।

महाबली के इस व्यवहार से प्रसन्न होकर महाविष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य सौंप दिया। पाताल जाने से पहले महाबली ने एक माँग की: वर्ष में केवल एक बार उन्हें अपनी प्रजा (अपने लोगों) से मिलने धरती पर आने दिया जाए। महाविष्णु ने यह माँग मान ली। लोग मानते हैं कि तब से महाबली हर वर्ष एक बार अपनी प्रजा को देखने केरल आते हैं। उनके स्वागत में केरल के लोग यह दिन ओणम के रूप में मनाते हैं।

पाठ की कथा में, वामन बने महाविष्णु ने महाबली से तीन पग भूमि माँगी, त्रिविक्रम बनकर दो पगों में तीनों लोक नाप लिए, महाबली ने तीसरे पग के लिए सिर झुका दिया; तब उन्हें पाताल का राज्य मिला और वर्ष में एक बार प्रजा से मिलने आने की माँग मानी गई — उसी की याद में ओणम मनाया जाता है।

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