LearnWave
Learn it. Master it.

ओणम के रंग

ओणम की परंपराएँ

ओणम की परंपराओं के बारे में जानो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 8 'ओणम के रंग' में बताया गया है कि ओणम कैसे मनाया जाता है। ओणम का सबसे खास दिन तिरुवोणम कहलाता है।

तिरुवोणम के दिन सब लोग बहुत सुबह महाबली के स्वागत के लिए तैयार हो जाते हैं। घर का हर सदस्य परिवार के मुखिया (घर के सबसे बड़े व्यक्ति) के हाथों से नए कपड़े लेकर पहनता है। फिर सब तैयारियों में जुट जाते हैं — फूल इकट्ठे करना, और विष्णु तथा महाबली की मूर्तियाँ सजाना।

मूर्तियों के सामने ऊँचे-ऊँचे दीपदान (दीपक रखने के ऊँचे स्टैंड) जलाकर रखे जाते हैं। मूर्तियों को चावल के आटे और नन्हे-नन्हे सफ़ेद द्रोण-पुष्पों से सजाया जाता है।

ओणम के भोज में चावल, सब्ज़ियाँ, खीर, पापड़ और कई तरह के स्वादिष्ट फल होते हैं। भोज के बाद लोग अपनी रुचि के अनुसार खेल-कूद, कविता, संगीत या नृत्य में हिस्सा लेते हैं। नावों की सैर (नौका विहार) और केरल का प्रसिद्ध नृत्य कथकली भी ओणम के आकर्षण हैं।

लोगों का विश्वास है कि तिरुवोणम के तीसरे दिन महाबली पाताल लोक लौट जाते हैं। इसलिए तिरुवोणम के दिन आँगन में बनाई गई कलाकृतियाँ (जैसे पूक्कलम) महाबली के चले जाने के बाद ही हटाई जाती हैं।

पाठ में, तिरुवोणम पर सब मुखिया के हाथों से नए कपड़े पहनते हैं, विष्णु और महाबली की मूर्तियाँ दीपदान, चावल के आटे और द्रोण-पुष्पों से सजाते हैं, भोज करते हैं; और आँगन की कलाकृतियाँ तीसरे दिन महाबली के पाताल लौटने के बाद ही हटाई जाती हैं।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.