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ओणम के रंग

फसल के त्योहार

भारत के फसल के त्योहारों के बारे में जानो।

पाठ 'ओणम के रंग' में लिखा है कि ओणम के समय किसान अपनी उपज (फ़सल) काट चुके होते हैं और खलिहानों में धान भरा होता है। इसलिए ओणम खेतों की उपज से जुड़ा त्योहार है। जब मेहनत से उगाई फ़सल कटकर घर आती है, तो लोग खुशी से त्योहार मनाते हैं।

आपकी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 100 पर 'देश हमारा एक, रंग इसके अनेक' में उपज से जुड़े सात त्योहारों के नाम दिए गए हैं: ओणम, लोहड़ी, पोंगल, साङकेन, बिहू, छठ और फूलदेई। किताब कहती है कि इन्हें भारत के नक्शे में अलग-अलग रंगों से दिखाओ — ओणम पीला, लोहड़ी लाल, पोंगल हरा, साङकेन नीला, बिहू भूरा, छठ नारंगी और फूलदेई गुलाबी।

ये त्योहार देश के अलग-अलग राज्यों में मनाए जाते हैं — ओणम केरल में, जैसा हमने पाठ में पढ़ा। एक मज़ेदार बात: 'बिहू' नाम किताब में दो बार आया है — एक बार पृष्ठ 99 पर एक नृत्य के रूप में, और फिर यहाँ एक त्योहार के रूप में।

हमारे देश में बहुत-से दूसरे त्योहार भी हैं, जैसे दीवाली, होली, ईद और क्रिसमस, पर वे किताब की इस सूची में नहीं हैं। इस सूची में वही त्योहार हैं जिन्हें किताब खेतों की उपज से जोड़ती है।

किताब में खेतों की उपज से जुड़े त्योहार हैं: ओणम, लोहड़ी, पोंगल, साङकेन, बिहू, छठ और फूलदेई — ये फ़सल कटने की खुशी से जुड़े हैं और देश के अलग-अलग राज्यों में मनाए जाते हैं।

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