किरन
कविता की लड़की
जानो कि कविता में किरन से बात करने वाली लड़की कौन है।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 1 खोलो और कविता 'किरन' फिर से पढ़ो। इस बार हम कविता की बालिका की बातें ध्यान से समझेंगे। पूरी कविता में वही किरन से बात कर रही है।
सुबह-सुबह जब किरन आती है, तब बालिका अभी अपने बिस्तर में ही है — वह अब तक बिस्तर से निकल भी नहीं पाई। इसलिए उसे अचरज होता है कि किरन आज इतनी जल्दी कैसे आ गई।
फिर बालिका बीते हुए कल की बात बताती है। कल वह शाम तक किरन के साथ बहुत-से खेल खेलती रही। इससे पता चलता है कि किरन दिन भर उसके साथ रहती है। पर शाम को जब किरन चली गई — बालिका समझती है कि वह सोने चली गई — तब बालिका अकेली रह गई।
रात को बालिका को जल्दी नींद नहीं आई। वह परी कथाएँ पढ़ती रही, और पढ़ते-पढ़ते बहुत देर से सो पाई। यही कारण है कि सुबह किरन के आने पर भी वह बिस्तर में पड़ी थी। बालिका सोचती है कि किरन तो सुख से सोई होगी — पर किरन बताती है कि वह कभी सोती ही नहीं।
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