किरन
वहाँ और यहाँ
कविता का आखिरी हिस्सा पढ़ो और 'वहाँ' और 'यहाँ' का अर्थ समझो।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 1 खोलो और कविता 'किरन' का आखिरी हिस्सा पढ़ो, जहाँ किरन बालिका को जवाब देती है। फिर पृष्ठ 3 पर 'सोचिए और लिखिए' का दूसरा प्रश्न देखो। उसमें पूछा गया है कि किरन की बात में 'वहाँ' और 'यहाँ' शब्द किसके लिए आए हैं।
पहले किरन की पूरी बात याद करो। किरन कहती है कि बालिका को सुलाकर वह एक दूसरी दुनिया में चली जाती है और वहाँ सोए बच्चों को जगाती है। आखिर में वह कहती है कि जब 'वहाँ' शाम हो जाती है, तब वह 'यहाँ' लौट आती है।
'वहाँ' शब्द किसी दूर की जगह के लिए बोला जाता है। किरन जिस दूर की जगह की बात कर रही है, वह है — वह दूसरी दुनिया, जहाँ वह रात को बच्चों को जगाने जाती है। तो 'वहाँ' = वह दूसरी दुनिया।
'यहाँ' शब्द उस जगह के लिए बोला जाता है जहाँ बोलने वाला इस समय है। किरन इस समय बालिका के पास है, उससे बात कर रही है। तो 'यहाँ' = बालिका की दुनिया, जहाँ किरन हर सुबह लौटकर आती है।
याद रखने का आसान तरीका: 'यहाँ' पास की जगह है, 'वहाँ' दूर की जगह। किरन की बात में पास की जगह बालिका की दुनिया है और दूर की जगह दूसरी दुनिया।
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