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किरन

कविता और गद्य

एक ही बात को कविता और गद्य, दोनों तरह से कहना सीखो।

एक ही बात को हम दो तरह से कह सकते हैं — कविता के रूप में, या सामान्य बातचीत के रूप में। तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 5 पर 'भाषा की बात' के तीसरे प्रश्न में यही सिखाया गया है। कविता में शब्द कम होते हैं, उनमें लय (गाने जैसी चाल) होती है, और कभी-कभी शब्दों का क्रम भी बदल जाता है। बातचीत में हम पूरी बात खोलकर, सीधे क्रम में कहते हैं।

किताब का पहला उदाहरण कविता की दो छोटी पंक्तियाँ हैं: "चिड़ियाँ गाती गीत चलीं, हवा चली, खिल उठे पेड़ सब।" इसे बातचीत में कहें तो कुछ ऐसे कहेंगे: चिड़ियाँ गीत गाती हुई उड़ रही थीं, हवा चलने लगी, और हवा से पेड़-पौधों की पत्तियाँ ऐसे हिलने लगीं मानो वे खुशी से झूम रही हों। देखो, कविता में 'गाती गीत' लिखा है, पर बातचीत में हम 'गीत गाती' कहते हैं।

किताब का दूसरा उदाहरण उलटी दिशा में चलता है। सामान्य बात है: चंद्रमा चमक रहा है, तारे भी चमक रहे हैं, और आकाश में चारों ओर प्रकाश ही प्रकाश है। इसी बात को कविता का रूप दिया गया: "चंदा चमका तारे चमके, चमका सारा अंबर।" यहाँ 'चंद्रमा' की जगह प्यारा-सा 'चंदा' आया, 'आकाश' की जगह 'अंबर', और 'चमका' शब्द बार-बार आकर लय बनाता है।

मिलान करने का तरीका: दोनों रूपों में देखो कि कौन-कौन (चिड़ियाँ, हवा, चाँद, तारे) और क्या-क्या हो रहा है। अगर बात वही है और केवल कहने का ढंग बदला है, तो दोनों रूप एक-दूसरे से मिलते हैं।

एक ही बात कविता में कम शब्दों और लय के साथ कही जाती है, और बातचीत में पूरी बात सीधे क्रम में — जैसे 'चंदा चमका तारे चमके, चमका सारा अंबर' का अर्थ है कि चाँद और तारे चमक रहे हैं और आकाश में चारों ओर प्रकाश है।

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