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गंगा की कहानी

गंगा का जन्म

गंगा की अपनी ज़ुबानी उसकी कहानी सुनो और जानो कि उसका जन्म कहाँ हुआ।

आपकी किताब 'वीणा' का पाठ 12 'गंगा की कहानी' बड़ा अनोखा है — इसमें गंगा नदी खुद अपनी कहानी सुनाती है, जैसे कोई व्यक्ति बोल रहा हो। इसलिए पाठ में 'मैं', 'मेरा', 'मुझे' जैसे शब्द गंगा नदी के लिए आए हैं। जैसे 'मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था' — यहाँ 'मेरा' यानी गंगा नदी का।

गंगा बताती है कि उसका जन्म हिमालय की गोद में हुआ। वह एक नन्ही-सी धारा के रूप में गंगोत्री हिमनद से निकलती है। हिमनद बर्फ़ का एक बहुत बड़ा भंडार होता है, जो नदी की तरह पहाड़ों पर धीरे-धीरे खिसकता है। जिस जगह से गंगा निकलती है, उसे गोमुख कहते हैं। यह जगह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद (ज़िले) में है।

गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री में गंगा का सुंदर मंदिर है, जहाँ देश भर से तीर्थयात्री आते हैं।

गंगा बताती है कि राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। इसलिए उसका एक नाम भागीरथी भी है। वहाँ से वह पहाड़ों को चीरती, चट्टानों से टकराती, उछलती-कूदती आगे बढ़ती है।

गंगा का जन्म हिमालय की गोद में हुआ; वह उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में गंगोत्री हिमनद के गोमुख से निकलती है, गंगोत्री में उसका मंदिर है, और राजा भगीरथ की तपस्या के कारण उसका एक नाम भागीरथी है।

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