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गंगा की कहानी

गंगा की यात्रा: पहला भाग

गंगा के साथ उसकी यात्रा का पहला भाग पूरा करो।

आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 12 'गंगा की कहानी' में गंगा आगे बताती है कि पहाड़ों से उतरते हुए उसके रास्ते में क्या-क्या आता है। देवप्रयाग में अलकनंदा नदी आकर उससे मिल जाती है।

ऋषिकेश के बाद गंगा पहाड़ों से मैदान में उतर आती है। उसके किनारों पर साधु-संतों और महात्माओं के आश्रम हैं। उसके तट पर बहुत-से नगर बस गए हैं और कई कारखाने खुल गए हैं। गंगा कहती है कि इन सबको पानी वही पहुँचाती है।

ऋषिकेश और हरिद्वार गंगा के किनारे बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है। हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है।

हरिद्वार के पास से एक नहर निकाली गई है, जिसे गंगानहर कहते हैं। यह नहर लाखों एकड़ भूमि को सींचती हुई (खेतों तक पानी पहुँचाती हुई) उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद पहुँचती है। गंगा भी घूमती-घामती कानपुर पहुँच जाती है।

कानपुर भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर है — यानी ऐसा नगर जहाँ बहुत-से कारखाने हैं। यहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने हैं, और इन कारखानों को पानी गंगा से ही मिलता है।

देवप्रयाग में अलकनंदा गंगा से मिलती है, ऋषिकेश के बाद गंगा मैदान में उतरती है, ऋषिकेश और हरिद्वार उसके किनारे बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं (हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ), और कानपुर एक औद्योगिक नगर है जिसके कारखानों को गंगा से पानी मिलता है।

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