गंगा की कहानी
गंगा के रास्ते के स्थान
गंगा के रास्ते में आने वाले स्थानों के बारे में जानो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 12 में गंगा अपनी पूरी यात्रा सुनाती है — पहाड़ों से समुद्र तक। आओ, उसके रास्ते के स्थानों को उसी क्रम में रखें, जिस क्रम में गंगा उनसे होकर बहती है।
पहाड़ों में: सबसे पहले गोमुख, जहाँ से गंगा निकलती है। फिर थोड़ा नीचे गंगोत्री, जहाँ उसका मंदिर है। फिर देवप्रयाग, जहाँ अलकनंदा मिलती है। फिर ऋषिकेश और उसके बाद हरिद्वार — दोनों प्रसिद्ध तीर्थ।
मैदान में: हरिद्वार के बाद कानपुर (औद्योगिक नगर)। फिर प्रयागराज, जहाँ यमुना से संगम होता है। फिर वाराणसी यानी काशी। फिर बिहार में पटना और उसके बाद भागलपुर।
अंत में: गंगा पश्चिम बंगाल पहुँचती है, जहाँ उसकी दो धाराएँ हो जाती हैं — पद्मा (बांग्लादेश में) और हुगली (कोलकाता की ओर)। और आखिर में वह बंगाल की खाड़ी में समुद्र से मिल जाती है।
पूरा क्रम एक साथ: गोमुख → गंगोत्री → देवप्रयाग → ऋषिकेश → हरिद्वार → कानपुर → प्रयागराज → वाराणसी → पटना → भागलपुर → पश्चिम बंगाल → बंगाल की खाड़ी।
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