गंगा की कहानी
पानी के स्रोत
पानी के अलग-अलग स्रोतों के बारे में जानो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 12 में पृष्ठ 146 पर छह चित्र हैं, और हर चित्र में पानी का एक स्रोत दिखाया गया है। स्रोत का अर्थ है — वह जगह जहाँ से हमें पानी मिलता है। आओ, इन स्रोतों को उनकी पहचान से जानें।
नदी — ज़मीन पर लगातार एक ओर बहता पानी, जैसे गंगा। झरना — ऊँची चट्टान से नीचे गिरता पानी। हिमनद (बर्फ़) — बर्फ़ का बहुत बड़ा भंडार; बर्फ़ पिघलकर पानी बनती है। गंगा भी गंगोत्री हिमनद से ही निकलती है।
कुआँ — ज़मीन में खोदा गया गहरा, गोल गड्ढा, जिसमें नीचे पानी होता है; ऊपर लगी चरखी और रस्सी से बाल्टी डालकर पानी खींचते हैं। हैंडपंप — लोहे का पंप, जिसका हत्था ऊपर-नीचे चलाने से ज़मीन के नीचे का पानी नल से बाहर आता है।
तालाब — ज़मीन के एक गड्ढे में इकट्ठा, ठहरा हुआ पानी; इसका पानी नदी की तरह बहता नहीं है। इसके किनारों पर अक्सर घास और पत्थर होते हैं।
याद रखो: नदी और झरने का पानी बहता है, तालाब का पानी ठहरा रहता है, और कुएँ और हैंडपंप से ज़मीन के नीचे का पानी ऊपर निकाला जाता है।
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