चाँद का कुरता
'भर' के अर्थ
'भर' शब्द के अलग-अलग अर्थ जानो।
कविता 'चाँद का कुरता' में चाँद शिकायत करता है कि ठंडी हवा 'रात भर' चलती है। तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 26 पर 'भाषा की बात' के पहले प्रश्न में इसी छोटे-से शब्द 'भर' की बात है।
'रात भर' का अर्थ है — पूरी रात, रात के शुरू से अंत तक। यानी हवा थोड़ी देर नहीं, सारी रात चलती रहती है। इसी तरह किताब का उदाहरण है: 'उसने दिन भर पढ़ाई की' — यानी पूरे दिन पढ़ाई की। जब 'भर' किसी समय वाले शब्द (रात, दिन, साल, महीना) के बाद आता है, तो वह बताता है कि बात पूरे समय तक होती रही। जैसे: 'बच्चे साल भर इस मेले का इंतज़ार करते हैं।'
किताब का दूसरा उदाहरण है: 'पानी गिलास भर है।' यहाँ 'भर' का अर्थ है — जितना पानी उस गिलास में समा सके, यानी गिलास पूरा भरा है। जब 'भर' किसी बरतन या नाप वाले शब्द (गिलास, कटोरी, मुट्ठी, चम्मच) के बाद आता है, तो वह बताता है कि कितनी मात्रा है। जैसे: 'माँ ने मुझे कटोरी भर दाल दी।'
तो 'भर' के दोनों प्रयोगों में 'पूरा' का भाव छिपा है — कहीं पूरा समय (रात भर, दिन भर), कहीं पूरा बरतन (गिलास भर, कटोरी भर)। किताब कहती है कि तुम भी 'भर' से पाँच वाक्य बनाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखो।
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