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चाँद का कुरता

दोहराए गए शब्द

कविता में दोहराए गए शब्द पहचानो।

तुम्हारी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 26 पर 'भाषा की बात' के दूसरे प्रश्न में दो वाक्य हैं, जो कविता 'चाँद का कुरता' से लिए गए हैं। दोनों लगभग एक जैसे हैं — बस पहले में 'ठिठुरकर' है और दूसरे में 'ठिठुर-ठिठुरकर'। चाँद जाड़े में अपनी आसमान की यात्रा ठिठुरते हुए पूरी करता है।

दोनों में क्या अंतर है? 'ठिठुरकर' से पता चलता है कि चाँद ठंड से काँप रहा था। पर 'ठिठुर-ठिठुरकर' से लगता है कि वह बार-बार, बहुत ज़्यादा काँप रहा था — पूरे रास्ते। शब्द को दो बार बोलने से बात पर ज़्यादा बल (ज़ोर) पड़ता है।

किताब इसका एक और उदाहरण देती है: 'जल्दी चलो' और 'जल्दी-जल्दी चलो'। 'जल्दी-जल्दी चलो' में ज़्यादा ज़ोर है — मानो कह रहे हों कि और भी तेज़ चलो, देर हो रही है! ऐसे ही हम कहते हैं: 'धीरे-धीरे बोलो', 'बार-बार पूछो', 'घर-घर जाकर बताओ'।

ध्यान रखो: दोहराए गए शब्द में एक ही शब्द दो बार आता है (जल्दी-जल्दी, धीरे-धीरे)। 'लंबा-चौड़ा' जैसे जोड़े में दो अलग-अलग शब्द हैं — वह दोहराया गया शब्द नहीं है। किताब कहती है कि ऐसे दोहराए गए शब्दों से पाँच वाक्य बनाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखो।

बात पर बल (ज़ोर) देने के लिए हम कभी-कभी एक ही शब्द को दो बार बोलते हैं, जैसे ठिठुरकर — ठिठुर-ठिठुरकर, जल्दी चलो — जल्दी-जल्दी चलो।

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