साङकेन
समान अर्थ वाले शब्द
समान अर्थ वाले शब्द सीखो।
जिन शब्दों का अर्थ एक जैसा होता है, उन्हें समानार्थी शब्द कहते हैं — जैसे 'मित्र' और 'दोस्त'। आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 4 'साङकेन' में (पृष्ठ 39 पर) पाठ के चार वाक्य दिए हैं। उनके रेखांकित शब्दों की जगह समानार्थी शब्द रखकर वाक्य फिर से लिखने हैं।
पाठ के शब्दों के समानार्थी ये हैं: मित्र — दोस्त; घर — मकान या गृह; गाँव — ग्राम; नदी — सरिता; किनारा — तट; पेड़ — वृक्ष या तरु; टहनी — डाली या शाखा; त्योहार — पर्व या उत्सव।
अब देखो, वाक्य कैसे बदलते हैं। 'वल्लरी को उसके मित्र चाऊतान ने बुलाया' बन जाएगा 'वल्लरी को उसके दोस्त चाऊतान ने बुलाया।' 'गाँव के लोगों ने नदी के किनारे मंदिर बनाया' बन जाएगा 'ग्राम के लोगों ने सरिता के तट पर मंदिर बनाया।'
इसी तरह 'पेड़ों की हरी-भरी टहनियाँ' बनेगा 'वृक्षों की हरी-भरी डालियाँ', और 'आज साङकेन का त्योहार है' बनेगा 'आज साङकेन का पर्व है।' ध्यान दो — शब्द बदल गए, पर वाक्य का अर्थ बिलकुल वही रहा।
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