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चतुर चित्रकार

कविता के मुहावरे

कविता में आए मुहावरे समझो।

मुहावरा शब्दों का ऐसा समूह होता है जिसका अर्थ उसके शब्दों से अलग, एक खास अर्थ होता है। 'होश उड़ जाना' का मतलब यह नहीं कि होश कोई चिड़िया है जो उड़ गई! अपनी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 65 पर 'भाषा की बात' में कविता 'चतुर चित्रकार' की चार पंक्तियाँ दी गई हैं, और उनमें छिपे मुहावरों के नीचे रेखा खींचनी है। आओ, उन मुहावरों को समझें।

होश उड़ जाना — बहुत डर जाना, घबरा जाना। कविता में शेर को देखते ही चित्रकार के होश उड़ जाते हैं, यानी वह बुरी तरह डर जाता है।

जोश न रहना — उत्साह खत्म हो जाना। शेर के आने के बाद नदी, पहाड़, पेड़ और पत्तों के चित्र बनाने का चित्रकार का सारा जोश चला जाता है। अब उसे चित्र की नहीं, अपनी जान की चिंता है।

जी भर के साँस लेना — राहत की साँस लेना, चैन की साँस लेना। झील के किनारे नाव पकड़ते ही चित्रकार जी भर के साँस लेता है, क्योंकि अब उसे बचने का रास्ता मिल गया था।

कविता की एक पंक्ति में दो मुहावरे एक साथ हैं। धोखा खाना — छला जाना, किसी की चाल में आ जाना। झुँझलाहट में चूर होना — बहुत ज़्यादा खीज जाना, चिढ़ से भर जाना। चित्रकार के भाग जाने पर शेर धोखा खा जाता है और झुँझलाहट में चूर हो जाता है।

होश उड़ जाना = बहुत डर जाना; जोश न रहना = उत्साह खत्म हो जाना; जी भर के साँस लेना = राहत की साँस लेना; धोखा खाना = छला जाना; झुँझलाहट में चूर होना = बहुत खीज जाना।

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