चतुर चित्रकार
कविता का अंत
कविता का अंत पढ़ो और देखो कि चित्रकार कितना चतुर है।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 62 खोलो और कविता 'चतुर चित्रकार' का आखिरी हिस्सा पढ़ो। यहाँ शेर और चित्रकार के बीच आखिरी बातचीत होती है।
चित्रकार नाव में बैठकर झील में दूर जा चुका था। शेर को समझ आ गया कि उसे बुद्धू बनाया गया है। वह बहुत खिसिया गया — यानी अपनी ही भूल पर शर्मिंदा भी था और चिढ़ा हुआ भी।
खिसियाया हुआ शेर चित्रकार से बोला कि थोड़ी देर के लिए नाव रोक दे और अपनी कलम और कागज़ भी साथ ले जाए। साथ ही उसने चित्रकार को 'कायर डरपोक' कहा। शेर चाहता था कि चित्रकार किसी तरह लौट आए — पर सामने से 'कायर डरपोक' कहकर वह अपनी झेंप भी मिटा रहा था।
चित्रकार लौटा नहीं। उसने तुरंत उत्तर दिया कि ये चीज़ें शेर अपने ही पास रख ले और जंगल में बैठकर चित्र बनाने का अभ्यास करे। यानी चित्रकार ने अपनी कलम और कागज़ शेर के लिए ही छोड़ दिए, और मज़ाक-मज़ाक में उसे चित्र बनाना सीखने की सलाह दे दी।
कविता यहीं खत्म होती है: चित्रकार की जान बच गई, और शेर के हाथ आए सिर्फ़ कलम और कागज़!
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