चतुर चित्रकार
आमों की पहेली
आमों की पहेली बूझो।
अपनी किताब 'वीणा' का पृष्ठ 71 खोलो और 'आज की पहेली' का पहला प्रश्न पढ़ो। यह पहेली कविता 'चतुर चित्रकार' के कवि ने ही रची है। इसमें चौदह नाम हैं: बाबूलाल, मदन, मुरलीधर, इलाचंद्र, हुबलाल, गिरिजाशंकर, बेनीमाधव, दंडपाणि, यशपाल, गणपति, काशीराम, कलापी, टहलराम और घनश्याम। पहेली पूछती है: ये सब 'एक से दूने' आम लेकर गए — तो कुल कितने आम थे?
'एक से दूने' का मतलब है: पहले व्यक्ति ने 1 आम लिया, और उसके बाद हर व्यक्ति ने अपने से पहले वाले का दुगुना लिया। दूना यानी दुगुना।
तो आम ऐसे बढ़ते गए: 1, 2, 4, 8, 16, 32, 64, 128, 256, 512, 1024, 2048, 4096, 8192। गिनो — ये चौदह संख्याएँ हैं, हर व्यक्ति की एक। चौदहवें व्यक्ति, यानी घनश्याम, के हिस्से 8192 आम आए।
अब सबको जोड़ना है। एक मज़ेदार तरीका देखो: 1 = 1; 1 + 2 = 3; 1 + 2 + 4 = 7; 1 + 2 + 4 + 8 = 15। हर बार कुल जोड़ अगले व्यक्ति के हिस्से से ठीक 1 कम आता है! चौदह लोगों के बाद अगला हिस्सा 16384 होता, इसलिए कुल आम हुए 16384 से 1 कम — यानी 16383।
किताब के उत्तर में भी यही लिखा है: कुल 16383 आम।
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