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मेरा बचपन

पहर

पहर से समय गिनने का पुराना तरीका जानो।

पाठ 'मेरा बचपन' में लेखक कहते हैं कि वे दोपहर से ही रामलीला के पात्रों की सजावट देखने जा बैठते थे। अपनी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 80 पर 'आइए जानें' में बताया गया है कि 'दोपहर' शब्द 'पहर' से बना है।

पहर समय को नापने का एक पुराना तरीका है। एक पहर का मतलब है तीन घंटे का समय।

किताब में दिन के चार पहर दिए गए हैं: सुबह 6 बजे से 9 बजे तक, 9 बजे से 12 बजे तक, 12 बजे से 3 बजे तक, और 3 बजे से 6 बजे तक। हर पहर तीन घंटे का है, इसलिए दिन के चार पहरों में कुल 12 घंटे होते हैं।

रात के भी इसी तरह चार पहर होते हैं। तो एक दिन और एक रात में कुल मिलाकर आठ पहर होते हैं। जाँच लो: आठ पहर, हर एक तीन घंटे का — 3 + 3 + 3 + 3 + 3 + 3 + 3 + 3 = 24 घंटे, यानी पूरा एक दिन-रात।

अब 'दोपहर' को समझो: दिन का वह समय जब सुबह के दो पहर बीत चुके होते हैं और 12 बजते हैं। इसीलिए 12 बजे के आसपास के समय को दोपहर कहते हैं।

'दोपहर' शब्द 'पहर' से बना है; एक पहर तीन घंटे का होता है, दिन के चार पहर हैं (6-9, 9-12, 12-3, 3-6), और एक दिन व एक रात में कुल आठ पहर होते हैं।

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