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मेरा बचपन

चना-चबेना

जानो कि चना-चबेना क्या होता है।

पाठ 'मेरा बचपन' में लेखक बताते हैं कि वे और हलधर सुबह-सुबह सबसे पहले मटर और जौ का चबेना खाते थे। अपनी किताब 'वीणा' के पृष्ठ 79 पर 'खान-पान' में चबेने के बारे में दो जानकारियाँ दी गई हैं। आओ, उन्हें पढ़ें।

चना-चबेना उस खाने को कहते हैं जो चबाकर खाया जाता है — जैसे मकई, चिउड़ा, भेल, भुने हुए दाने, भुने चावल, चना, मटर और मुरमुरे, भुना हुआ या उबला हुआ हरा चना। हम भारतीय देश के किसी भी कोने में रहें, किसी-न-किसी रूप में ऐसा कुछ चबाते ही हैं।

कचरियाँ, कुरकुरे, पापड़ और नमकीन भी चबेने जैसे ही हैं। पर ये ज़्यादातर बाज़ार से आते हैं। इनमें स्वाद तो बहुत होता है, पर ये शरीर के लिए उतने स्वास्थ्यवर्धक नहीं होते जितने घर के बने चबेने।

देश में अलग-अलग जगह चना-चबेना अपने-अपने ढंग से बनता है। इसमें मटर, चना, सूखा चना, मिर्च-अदरक, प्याज-लहसुन, मक्का, पोहा, लाई और मूँगफली जैसी चीज़ें होती हैं।

बनाने का तरीका, क्रम से: पहले इन सबको कड़ाही में नमक डालकर अच्छी तरह भूनते हैं। भूनने के बाद उसमें हल्का तेल मिलाते हैं। फिर मिर्च की चटनी के साथ प्याज और लहसुन मिलाते हैं। इनसे चना-चबेना का स्वाद और बढ़ जाता है।

चना-चबेना वह खाना है जो चबाकर खाया जाता है; इसे नमक के साथ कड़ाही में भूनकर, फिर हल्का तेल और मिर्च की चटनी, प्याज, लहसुन मिलाकर बनाते हैं — और घर का बना चबेना बाज़ार के कुरकुरे-नमकीन से ज़्यादा स्वास्थ्यवर्धक होता है।

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