न्याय
अनुस्वार और चंद्रबिंदु
अनुस्वार और चंद्रबिंदु का अंतर समझो।
आपकी किताब 'वीणा' के पाठ 9 'न्याय' नाटक में दो शब्द आए हैं जो लगभग एक जैसे दिखते हैं: 'हंस' और 'हँस'। 'हंस' एक पक्षी है — वही जो सिद्धार्थ की गोद में गिरा था। 'हँस' हँसने से बना है — जैसे नाटक में सिद्धार्थ और सखा '(हँसकर)' बोलते हैं।
अंतर एक छोटे से चिह्न का है। 'हंस' में 'ह' के ऊपर केवल एक बिंदी है (ं) — इसे अनुस्वार कहते हैं। 'हँस' में 'ह' के ऊपर आधा चाँद और उसमें बिंदी है (ँ) — इसे चंद्रबिंदु कहते हैं। एक चिह्न बदलते ही शब्द का अर्थ बदल गया!
बोलने में भी अंतर है। अनुस्वार वाले अक्षर के बाद 'न' या 'म' जैसी आवाज़ आती है — 'हंस' को बोलो तो 'हन्स' जैसा सुनाई देता है। चंद्रबिंदु में आवाज़ नाक से निकलती है, पर अलग से 'न' नहीं बोला जाता — जैसे 'माँ', 'चाँद'।
नाटक में अनुस्वार वाले और भी शब्द हैं: शांति, रंगमंच, संध्याकाल, कंठ, गंभीर। और चंद्रबिंदु वाले शब्द हैं: हँसकर, साँस, काँपता, मुँह, यहाँ।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.