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सिल्वर वैडिंग

किशनदा और 'जो हुआ होगा'

'जो हुआ होगा' की अर्थ-छवियाँ और यशोधर-परिवार के टकराव समझाना।

पुरानी आदतें. यशोधर बाबू गोल मार्केट का अपना पुराना सरकारी क्वार्टर नहीं छोड़ते। वे रोज़ शाम बिड़ला मंदिर जाते हैं, और देर से घर लौटते हैं, क्योंकि घर में हर बात पर मतभेद है।

बच्चे. बड़ा बेटा भूषण एक विज्ञापन कंपनी में डेढ़ हज़ार रुपये कमाता है; दूसरा आई.ए.एस. की तैयारी कर रहा है; तीसरा छात्रवृत्ति लेकर अमरीका चला गया। बेटी विवाह के हर प्रस्ताव से मना कर देती है।

बच्चों की तरक्की, पिता की उलझन. यशोधर बाबू को डेढ़ हज़ार रुपये की तनख़्वाह रिटायरमेंट के पास पहुँचकर मिली है, इसलिए उन्हें लगता है कि शुरू में ही इतना देने वाली नौकरी में 'ज़रूर कुछ पेंच होगा'। दूसरे बेटे का नाम पिछले साल 'एलाइड सर्विसेज़' की सूची में नीचे आया था, फिर भी उसने नौकरी नहीं ली; यह बात उनकी समझ से बाहर है। वे बच्चों की तरक्की से खुश भी हैं, और सोचते भी हैं: ऐसी खुशहाली किस काम की जो अपनों में परायापन पैदा कर दे?

पत्नी. उनकी पत्नी पहले संयुक्त परिवार में बंधनों में रही थीं। अब वे बच्चों का साथ देती हैं, आधुनिक हो गई हैं, और पुरानी रीतियों को ढकोसला कहती हैं।

किशनदा का अंत. कुँआरे किशनदा ने सबकी मदद की थी। पर रिटायर होने पर किसी ने उन्हें अपने घर रहने को नहीं बुलाया। वे गाँव लौट गए, और वहीं मर गए। किस बीमारी से? लोग कहते, 'जो हुआ होगा', यानी पता नहीं क्या हुआ। उनका यह अकेला अंत यशोधर बाबू के मन का डर है।

किशनदा की सीखें. यशोधर बाबू के कई 'फ़िकरे' किशनदा से मिले हैं। बच्चों की मनमानी पर वे कहते हैं कि गधा-पचीसी (जवानी के नासमझ दिनों) में कोई क्या करता है, इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए: ज़िम्मेदारी पड़ेगी तो सब ठीक हो जाएँगे। डी.डी.ए. फ़्लैट के लिए पैसा न भरने पर बच्चे इसे 'भयंकर भूल' कहते हैं, पर उन्हें किशनदा की उक्ति अब भी जँचती है: 'मूरख लोग मकान बनाते हैं, सयाने उनमें रहते हैं।' उन्हें उम्मीद है कि कोई बेटा सरकारी नौकरी में आ जाएगा और क्वार्टर परिवार के पास बना रहेगा।

रिश्तेदारी. जीजा जनार्दन जोशी के बीमार होने की ख़बर पर वे अहमदाबाद जाना ज़रूरी समझते हैं, पर पत्नी और बच्चे बिखरे परिवार के प्रति इस लगाव को पैसे के हिसाब से मूर्खता मानते हैं।

परंपराएँ. यशोधर बाबू किशनदा की परंपराएँ निभाते हैं: घर में होली गवाना, जनेऊ बदलना, रामलीला की व्यवस्था। बच्चे इन्हें खर्चीला और शोर भरा मानते हैं।

किशनदा का अकेला अंत यशोधर बाबू के मन का डर है।

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