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ईदगाह

प्रेमचंद और 'ईदगाह'

लेखक और कहानी का परिचय देना।

लेखक. प्रेमचंद (सन् 1880-1936) का जन्म वाराणसी ज़िले के लमही गाँव में हुआ; उनका मूल नाम धनपतराय था। उन्होंने लिखना पहले उर्दू में 'नवाबराय' नाम से शुरू किया, बाद में हिंदी में लिखने लगे।

  • पढ़ाई ज़्यादातर अपने बल पर की। असहयोग आंदोलन के समय सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूरा जीवन लेखन को दे दिया।
  • वे साहित्य को केवल मन बहलाने की चीज़ नहीं, समाज बदलने का साधन मानते थे। किसान, दलित, स्त्रियाँ और जाति-व्यवस्था की बुराइयाँ उनके विषय हैं।
  • उनकी कहानियाँ 'मानसरोवर' (आठ भाग) में संकलित हैं; उपन्यास 'गोदान', 'गबन', 'निर्मला', 'सेवासदन', 'रंगभूमि', 'कर्मभूमि'; उन्होंने 'हंस' और 'माधुरी' जैसी पत्रिकाएँ भी निकालीं।

कहानी. 'ईदगाह' बाल-मनोविज्ञान की कहानी है। इसका नायक हामिद एक गरीब, अनाथ बच्चा है। कहानी दिखाती है कि अभाव (कमी) बच्चे को समय से पहले समझदार बना देता है: मेले में हामिद अपनी हर इच्छा पर संयम रखकर जीतता है।

  • 'रुस्तमे-हिंद' चिमटे के ज़रिए प्रेमचंद श्रम (मेहनत) और काम की चीज़ों का सम्मान दिखाते हैं, और यह कि सच्चा प्यार त्याग में दिखता है।

नया उदाहरण. जिस घर में पैसों की तंगी हो, वहाँ का छोटा बच्चा भी दुकान पर महँगी टॉफ़ी की जगह चुपचाप सस्ती चीज़ चुन लेता है: उसकी उम्र छोटी है, पर समझ बड़ी हो गई है। हामिद ऐसा ही बच्चा है।

समाज का सच, बच्चे की आँख से।

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