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Class 11
Hindi Elective: अंतरा भाग 1
64 lessons in 16 chapters, explained in plain words.
ईदगाह
प्रेमचंद और 'ईदगाह'
ईद की सुबह और हामिद का घर
शहर का रास्ता और ईदगाह
मेला: खिलौने, मिठाइयाँ और चिमटा
शास्त्रार्थ: रुस्तमे-हिंद चिमटा
घर वापसी: खिलौनों का अंत और अमीना के आँसू
दोपहर का भोजन
अमरकांत और 'दोपहर का भोजन'
सिद्धेश्वरी और रामचंद्र
मोहन और मुंशी जी
आधी रोटी: कहानी का अंत
टार्च बेचनेवाले
हरिशंकर परसाई और व्यंग्य
टार्च बेचनेवाला और 'पैसा कैसे पैदा करें?'
भव्य पुरुष का प्रवचन
दो धंधे, एक 'टार्च'
गूँगे
रांगेय राघव और 'गूँगे'
गूँगे से परिचय: इशारों में एक जीवन
चमेली का घर: भागना, लौटना और पक्षपात
घर से निकाला जाना और 'गूँगे' का बड़ा अर्थ
ज्योतिबा फुले
सुधा अरोड़ा और जीवनी विधा
फुले के विचार: व्यवस्था से टक्कर
स्त्री-समानता और 'महात्मा'
सावित्री बाई और फुले दंपति का संघर्ष
खानाबदोश
ओमप्रकाश वाल्मीकि और दलित साहित्य
भट्ठे पर नई ज़िंदगी
सूबेसिंह का राज और पक्की ईंटों का सपना
मानो को बुलावा, जसदेव की पिटाई और रोटी
टूटी ईंटें और खानाबदोश यात्रा
उसकी माँ
'उग्र' और 'उसकी माँ'
पुलिस का आगमन और चाचा की चेतावनी
लाल और चाचा: दो सिरे
जानकी और 'भारत माता'
गिरफ़्तारी, फाँसी और माँ का अंत
भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है?
भारतेंदु हरिश्चंद्र: नई चाल की हिंदी
बलिया का उत्साह और 'रेल की गाड़ी'
अवसर, आलस और उन्नति की घुड़दौड़
सुधार की राह: धर्म, समाज-धर्म और कुरीतियाँ
एकता, स्वदेशी और अपनी भाषा
कबीर — अरे इन दोहुन राह न पाई; बालम, आवो हमारे गेह रे
कबीर: जनभाषा के ज्ञानी कवि
पद 1: 'अरे इन दोहुन राह न पाई'
पद 2: 'बालम, आवो हमारे गेह रे'
सूरदास — खेलन में को काको गुसैयाँ; मुरली तऊ गुपालहिं भावति
सूरदास: वात्सल्य और शृंगार के कवि
पद 1: 'खेलन में को काको गुसैयाँ'
पद 2: 'मुरली तऊ गुपालहिं भावति'
देव — हँसी की चोट; सपना; दरबार
देव: रीतिकाल के प्रतिभाशाली कवि
हँसी की चोट
सपना
दरबार
सुमित्रानंदन पंत — संध्या के बाद
सुमित्रानंदन पंत: प्रकृति के सुकुमार कवि
साँझ का प्रकृति-चित्र
गाँव की उतरती रात
लाला का मन और समानता का सपना
महादेवी वर्मा — जाग तुझको दूर जाना
महादेवी वर्मा: करुणा और जागरण की कवयित्री
बाधाएँ भीषण भी, कोमल भी
आग, आँसू और अमर दीपक
नागार्जुन — बादल को घिरते देखा है
नागार्जुन: जनकवि और घुमक्कड़
हिम-शिखर, मानसरोवर और हंस
चकवा-चकई और कस्तूरी मृग
कालिदास की याद, कैलाश का महामेघ और किन्नर-लोक
श्रीकांत वर्मा — हस्तक्षेप
श्रीकांत वर्मा और 'मगध'
मगध की 'शांति' और 'व्यवस्था'
टोकने का डर और मुर्दे का प्रश्न
धूमिल — घर में वापसी
धूमिल: आक्रोश और करुणा के कवि
पाँच जोड़ी आँखें
बंद रिश्ते, खोई ताली और 'यह मेरा घर है'