ईदगाह
शहर का रास्ता और ईदगाह
रास्ते और ईदगाह के दृश्य समझाना।
शहर का रास्ता. गाँव के बच्चे बड़ों के साथ ईदगाह की ओर चलते हैं। रास्ते में अमीरों के बगीचे, फिर अदालत, कॉलेज और क्लब-घर आते हैं, और बच्चे हर इमारत के बारे में अपनी अनोखी बातें गढ़ते हैं: जैसे क्लब में 'मुर्दे की खोपड़ियाँ दौड़ती हैं'!
बच्चों की बातों में समाज.
- मोहसिन शहर की मेमों और अपनी अम्मा की तुलना करता है: अम्मा मनों आटा पीस डालती हैं और सैकड़ों घड़े पानी भर लेती हैं। इसमें गाँव की औरतों की मेहनत पर बच्चे का भोला गर्व है।
- हलवाइयों की दुकानों पर जिन्नात की कहानियाँ चलती हैं।
- पुलिस लाइन देखकर एक बच्चा बताता है कि उसके मामूँ की तनख़्वाह बीस रुपये है, पर घर पचास भेजते हैं: बच्चों की बातों में 'ऊपरी कमाई' (रिश्वत) की सच्चाई झलक जाती है।
भीड़ और शहर. शहर की चमक-दमक में बच्चे चीज़ें देखते रह जाते हैं; हामिद एक मोटर के नीचे आते-आते बचता है।
ईदगाह का दृश्य. ईदगाह में इमली के घने पेड़ों के नीचे लाखों लोग एक साथ नमाज़ पढ़ते हैं। वहाँ धन और पद का कोई भेद नहीं: सब एक साथ झुकते और उठते हैं। लेखक इसकी तुलना बिजली की लाखों बत्तियों से करते हैं, जो एक साथ जलें और बुझें। उन्हें लगता है कि भाईचारे का एक धागा सबको एक माला में पिरोए हुए है।
नया उदाहरण. स्वतंत्रता दिवस पर किसी बड़े मैदान में हज़ारों लोग एक साथ राष्ट्रगान गाने के लिए खड़े हों, तो उस पल वहाँ कोई अमीर-गरीब नहीं, सब एक लय में होते हैं: ईदगाह का दृश्य भी ऐसी ही एकता का है।
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