ईदगाह
मेला: खिलौने, मिठाइयाँ और चिमटा
हामिद के मन के संघर्ष को समझाना।
झूले और खिलौने. नमाज़ के बाद मेला। हिंडोला (झूला) और चर्खी एक-एक पैसे की हैं; बाकी बच्चे बैठते हैं, पर हामिद अपने तीन पैसों में से एक तिहाई गँवाना नहीं चाहता।
- खिलौने दो-दो पैसे के हैं: महमूद का सिपाही, मोहसिन का भिश्ती (पानी भरने वाला), नूरे का वकील, सम्मी की धोबिन।
- हामिद उनकी निंदा करता है ('मिट्टी के ही तो हैं, गिरें तो चकनाचूर'), पर ललचाई आँखों से देखता भी है।
मिठाई और अपमान. बच्चे रेवड़ियाँ, गुलाबजामुन, सोहन हलवा ख़रीदते हैं। मोहसिन हामिद को रेवड़ी देने का नाटक करता है और फिर अपने ही मुँह में रख लेता है; सब हँसते हैं। हामिद स्वाभिमान से कहता है: 'क्या मेरे पास पैसे नहीं हैं?' और मन को समझाने के लिए मिठाई की बुराइयाँ गिनाता है।
लोहे की दुकान. मेले के अंत में लोहे की चीज़ों की दुकान पर हामिद चिमटा देखता है। उसे याद आता है कि दादी के पास चिमटा नहीं, इसलिए तवे से रोटियाँ उतारते समय उनकी उँगलियाँ जल जाती हैं। मन में वह खिलौनों की बेकारी और चिमटे की उपयोगिता का हिसाब लगाता है।
मोल-भाव. दुकानदार छह पैसे, फिर पाँच पैसे माँगता है। हामिद हिम्मत करके तीन पैसे कहता है, और चिमटा उसे मिल जाता है। वह उसे बंदूक की तरह कंधे पर रखकर अकड़ता हुआ साथियों के पास लौटता है।
नया उदाहरण. कोई बच्चा जन्मदिन के पैसों से अपने लिए वीडियो गेम की जगह माँ के लिए चश्मे का नया डिब्बा ले आए, क्योंकि पुराना टूट गया था: अपनी चाह को रोककर अपनों की ज़रूरत चुनना ही हामिद की जीत है।
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.