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उसकी माँ

'उग्र' और 'उसकी माँ'

लेखक और कहानी का परिचय देना।

लेखक. पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (सन् 1900-1967) का जन्म उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर ज़िले के चुनार में हुआ। परिवार में अभाव के कारण उन्हें व्यवस्थित शिक्षा नहीं मिली, फिर भी अपनी प्रतिभा से वे बड़े गद्यकार बने।

  • वे 'आज', 'स्वदेश', 'विक्रम' आदि पत्रों के संपादक रहे, और 'मतवाला-मंडल' के प्रमुख सदस्य थे। निराला की तरह उन्हें भी पुराने विचारों वालों का कड़ा विरोध झेलना पड़ा।
  • रचनाएँ: कहानी-संग्रह 'पंजाब की महारानी', 'चित्र-विचित्र', 'कला का पुरस्कार'; उपन्यास 'बुधुआ की बेटी', 'दिल्ली का दलाल'; आत्मकथा 'अपनी खबर'।
  • उनकी भाषा सरल, सजीव और व्यंग्यपूर्ण है; उर्दू के बोलचाल के शब्द सहज रूप से आते हैं, और बात सीधे दिल पर लगती है।

कहानी. 'उसकी माँ' स्वाधीनता आंदोलन के समय की कहानी है। इसमें दो 'सिरे' हैं: एक ओर अंग्रेज़ी शासन के विरुद्ध खड़ी नई पीढ़ी के युवा, दूसरी ओर अपनी सुविधा के लिए सत्ता के आगे झुका पुराना धनी वर्ग। और इन दोनों के बीच पिसती है एक माँ।

नया उदाहरण. किसी आंदोलन के समय एक ही मोहल्ले में कोई युवा धरने पर बैठा हो, कोई सेठ चुपचाप अपना कारोबार बचा रहा हो, और किसी माँ को बस यह चिंता हो कि बेटा रात को खाना खाकर सोया या नहीं: एक ही समय, तीन अलग सच।

दो सिरों के बीच एक माँ।

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