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ज्योतिबा फुले

सावित्री बाई और फुले दंपति का संघर्ष

फुले दंपति के काम और आदर्श दांपत्य को समझाना।

सावित्री बाई की किताब. छह-सात साल की सावित्री को एक हाट में किसी अंग्रेज़ ने एक किताब दी। पिता ने गुस्से में किताब फेंक दी, पर सावित्री ने उसे उठाकर छिपाकर रख लिया, और सन् 1840 में ज्योतिबा फुले से विवाह के बाद उसे अपने साथ ससुराल ले आईं।

  • ज्योतिबा ने उन्हें मराठी के साथ अंग्रेज़ी पढ़ना, लिखना और बोलना भी सिखाया। शिक्षित होकर सावित्री बाई ने वही किताब पढ़ी।

पहली कन्याशाला. पाठ के अनुसार 14 जनवरी 1848 को पुणे के बुधवार पेठ में भिड़े के बाड़े में लड़कियों की पहली पाठशाला खुली (कई ऐतिहासिक स्रोत यह तिथि 1 जनवरी 1848 बताते हैं)। इसके बाद शूद्र और अतिशूद्र समझी जाने वाली जातियों की लड़कियों के लिए और पाठशालाएँ खोली गईं।

भारी विरोध:

  • समाज के दबाव में ज्योतिबा के पिता ने दोनों को घर से निकाल दिया।
  • पढ़ाने जाती सावित्री बाई पर लोग थूकते, पत्थर और गोबर फेंकते। फिर भी वे रुकीं नहीं।

साझा मिशन. दोनों ने मिलकर अनाथ बच्चों और विधवाओं के लिए आश्रय खोला, और अपने घर के पानी का हौद सभी जातियों के लिए खोल दिया। 1840 से 1890 तक, लगभग पचास वर्ष, दोनों ने एक प्राण होकर काम किया: आदर्श दांपत्य की मिसाल।

नया उदाहरण. किसी शहर में एक दंपति अपने घर के बरामदे में बस्ती के बच्चों को शाम को मुफ़्त पढ़ाए; पड़ोसी शिकायत करें, कुछ लोग ताने दें, पर वे सालों तक डटे रहें, और वही बच्चे आगे चलकर शिक्षक बनें: फुले दंपति की राह आज भी ऐसे ही चलती है।

एक और एक ग्यारह।

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