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रामचंद्र शुक्ल — प्रेमघन की छाया-स्मृति

आचार्य रामचंद्र शुक्ल

शुक्ल जी के प्रमुख ग्रंथ, उनकी शैली और इस संस्मरण का विषय बताना।

लेखक-परिचय. आचार्य रामचंद्र शुक्ल बस्ती ज़िले के अगोना गाँव में जन्मे। उनकी औपचारिक पढ़ाई केवल इंटरमीडिएट तक हुई; बाकी सब उन्होंने स्वाध्याय से सीखा।

जीवन-यात्रा. वे मिर्जापुर में चित्रकला के अध्यापक रहे। फिर 'हिंदी शब्द सागर' के सहायक संपादक बनकर काशी आए।

विश्वविद्यालय. बाद में वे काशी हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे।

रचनाएँ. उनकी प्रसिद्धि का सबसे बड़ा आधार 'हिंदी साहित्य का इतिहास' है। 'चिंतामणि' में भाव और मनोविकार (जैसे क्रोध, लोभ, उत्साह) पर निबंध हैं।

शैली. उनकी शैली विवेचनात्मक है: सूक्ष्म तर्क, सहृदयता, व्यंग्य-विनोद, और सूत्र जैसे छोटे, गहरे वाक्य। इस संस्मरण ('प्रेमघन की छाया-स्मृति') में शुक्ल जी ने बताया है कि बचपन में उनका साहित्यकार कैसे बना।

इस संस्मरण में शुक्ल जी ने बताया है कि बचपन में उनका साहित्यकार कैसे बना।

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