मियाँ नसीरुद्दीन
पाठ की भाषा
पाठ की भाषा की विशेषताएँ समझाना।
बोलचाल की भाषा. पाठ में पुरानी दिल्ली की ठेठ बोली है: 'अपन', 'बतावेंगे', 'इत्ता', 'लेवेंगे', 'साहिब', 'मजूरी'। इसी से मियाँ सचमुच बोलते हुए सुनाई देते हैं।
उर्दू शब्द. इल्म (ज्ञान), वालिद (पिता), मरहूम (जिसकी मृत्यु हो चुकी हो), नसीहत (सीख), शागिर्द (शिष्य), मज़मून (विषय), मोहलत (मिला हुआ समय), ज़हमत (कष्ट), लमहा भर (क्षणभर), पेशानी (माथा)।
मुहावरे और अंदाज़.
- बाल की खाल निकालना: बेकार की बारीकी में जाना।
- आँखों के कंचे फेरना: आँखें घुमाकर घूरना।
- बिटर-बिटर देखना: हैरानी से टकटकी लगाकर देखना।
- बजा फ़रमाना: ठीक बात कहना।
- ठीये पर आ बैठना: किसी की जगह सँभाल लेना।
शब्द-क्रम. बात पर ज़ोर देने के लिए शब्दों का क्रम बदला गया है, जैसे 'मियाँ मशहूर हैं छप्पन किस्म की रोटियाँ बनाने के लिए'। सामान्य क्रम में कर्ता पहले और क्रिया अंत में आती है।
हल्का व्यंग्य. लेखिका प्यार भरा व्यंग्य करती हैं: मियाँ को 'नानबाइयों का मसीहा' कहना, उनका 'पंचहज़ारी अंदाज़', और ऐसे सिर हिलाना 'कि सुकरात हों'।
नया उदाहरण. 'पहुँच गया मैं स्टेशन समय पर' को सामान्य क्रम में लिखें तो 'मैं समय पर स्टेशन पहुँच गया' बनता है; पहले वाक्य में 'पहुँच गया' पर ज़ोर है।
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