संवादहीन
शब्द-युग्म और वाक्य-भेद
शब्द-युग्म और वाक्य के भेद पहचानिए।
शब्द-युग्म यानी जोड़े में आने वाले शब्द। चार प्रकार: पुनरुक्त (वही शब्द दोबारा: बार-बार), सजातीय (एक जैसे काम: उठना-बैठना, तीज-त्योहार), समानार्थक (एक जैसा अर्थ: शादी-ब्याह, नियम-सिद्धांत), विपरीतार्थक (उल्टा अर्थ: दिन-रात, वक्त-बेवक्त)।
ध्वन्यात्मक शब्द आवाज़ जैसा लगते हैं: फड़फड़ाहट (पंख), टिक-टिक (घड़ी), छम-छम (पायल), गड़गड़ाहट (बादल)।
पशु-पक्षियों वाले मुहावरे: अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना (अपनी तारीफ़ खुद करना), हाथों के तोते उड़ना (घबरा जाना), भैंस के आगे बीन बजाना (ना-समझ को समझाना)।
अर्थ के हिसाब से वाक्य: विधानवाचक (सीधा कथन), निषेधवाचक ('न/नहीं' वाला), प्रश्नवाचक (सवाल), विस्मयादिबोधक (आश्चर्य, ख़ुशी, दुख), आज्ञावाचक (आदेश या आग्रह), इच्छावाचक (कामना), संदेहवाचक (शक), संकेतवाचक (एक बात दूसरी पर टिकी)।
कहानी से उदाहरण: 'जीते रहो बेटा, जुग-जुग जिओ!' इच्छावाचक; 'राम-राम कहो' आज्ञावाचक; 'मिट्ठू ने कोई हरकत नहीं की' निषेधवाचक; 'वो गए!!' विस्मयादिबोधक; 'न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा' संदेहवाचक।
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