संवादहीन
कुंभ, विज्ञापन और शब्द-संपदा
कुंभ के बारे में जानिए, विज्ञापन लिखिए और नए शब्द सीखिए।
तलाश का विज्ञापन (जैसे मिट्ठू खो जाने पर): एक शीर्षक, फिर खोए जीव या चीज़ की साफ़ पहचान (रंग, आकार, खासियत: 'हरा पहाड़ी तोता, राम-राम बोलता है'), कब और कहाँ से खोया, इनाम, और संपर्क का पता।
पाँचों इंद्रियों से वर्णन (जैसे कुंभ मेले का): देखना (रंग, भीड़), सुनना (ढोल, घंटे), सूँघना (धूप, पकवान), छूना (धक्का-मुक्की, ठंडा पानी), स्वाद (जलेबी, प्रसाद)।
कुंभ मेला हिंदू आस्था का बहुत बड़ा मेला है, जिसमें करोड़ों लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं। यह चार जगह लगता है: प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक।
शब्द-संपदा: ढोर (पालतू पशु), तकाज़ा (बार-बार माँगना), कुशाग्र (तेज़ बुद्धि वाला), पौ फटना (सुबह होना), अचकचाना (चौंक उठना), निहाल (बहुत ख़ुश), तुनकमिज़ाज (छोटी बात पर नाराज़ होने वाला)।
वियोग (बिछड़ना), साँकल (दरवाज़े की कुंडी), टोह (खोज), देहरी (चौखट), प्रायश्चित (गलती का सुधार, पछतावे में किया काम), कौतूहलवश (उत्सुकता से), मशगूल (किसी काम में डूबा), एवज़ी (बदले में रखा गया, जैसे नकली मिट्ठू), आग्नेय (आग जैसी, जैसे गुस्से भरी नज़र), जून (समय, बेला)।
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