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रीढ़ की हड्डी

एकांकी विधा और टिप्पणी

जानिए कि एकांकी विधा क्या होती है।

एकांकी यानी एक अंक का नाटक। इसमें भी कहानी होती है, पर उसे मंच पर खेलने के लिए संवादों में लिखा जाता है।

एकांकी के तत्व: नाम, लेखक, पात्र, परिवेश/देश-काल (कहाँ और कब), रंग-निर्देश/मंच-निर्देश, संवाद-निर्देश, समस्या, संवाद, मुख्य विचार, और समाधान/परिणाम। इस एकांकी की मुख्य समस्या: शादी के लिए कम पढ़ी लड़की की माँग, और लड़की को सामान की तरह परखना।

रंग-निर्देश (कोष्ठक में, तिरछे अक्षरों में) बताते हैं कि मंच कैसा हो और पात्र कैसे चलें-फिरें, जैसे शुरुआत का 'मामूली तरह से सजा हुआ एक कमरा...'। संवाद-निर्देश बताते हैं कि बात किस ढंग से कही जाए, जैसे '(ज़रा तेज़ आवाज़ में)' या '(हल्की लेकिन मज़बूत आवाज़ में)'; ये बोले नहीं जाते। निर्देशक ज़रूरत के हिसाब से मंच-सज्जा, रोशनी और कपड़ों में बदलाव कर सकता है।

अंत का मज़ा. आख़िर में रतन का 'बाबूजी, मक्खन!' हँसी भी है और व्यंग्य भी: जिस खुशामद और दिखावे के लिए इतनी भागदौड़ हुई, वह सब अब बेकार हो चुका है।

टिप्पणी किसी व्यक्ति, विषय या घटना पर छोटी-सी राय होती है। इसकी तीन विशेषताएँ: संक्षिप्तता (कम शब्दों में), स्पष्टता (सरल, तर्क वाली भाषा), और व्यक्तिपरकता (अपने विचार और सुझाव)।

एकांकी = एक अंक, संवाद, और कोष्ठक में मंच व बोलने के निर्देश।

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