मैं और मेरा देश
शब्द, अर्थ और रचना
पाठ के शब्दों, उनके अर्थ और रचना को समझिए।
एक शब्द, कई अर्थ. शब्द का अर्थ संदर्भ (आसपास की बात) तय करता है। 'दरार': दीवार की टूटन, या रिश्तों में खटास। 'गाँठ': धागे की गाँठ, या दो बातों को जोड़ने वाला बंधन (निबंध में देश और नागरिक की गाँठ)। 'पानी': जल; 'पानी-पानी होना': शर्मिंदा होना; 'पानी उतरना': इज़्ज़त जाना।
शब्द-युग्म दो शब्दों के जोड़े हैं; अर्थ में मिलते-जुलते (ममता-दुलार, भरा-पूरा), आवाज़ में मिलते-जुलते, या उल्टे हो सकते हैं: घूम-फिरकर, दाल-रोटी। पुनरुक्त: वही शब्द दोबारा, जैसे छोटी-छोटी, बड़ी-बड़ी, पूरा-पूरा।
उपसर्ग + मूल शब्द + प्रत्यय. कुछ शब्दों में आगे और पीछे दोनों जुड़ते हैं: अपूर्णता = अ + पूर्ण + ता; अलौकिक = अ + लोक + इक; निरक्षरता = निर् + अक्षर + ता; सम्मानित = सम् + मान + इत; अपमानित = अप + मान + इत; अभिमानी = अभि + मान + ई। तरकीब: पहले बीच का मूल शब्द ढूँढ़ो, फिर देखो आगे क्या लगा, पीछे क्या।
शब्द-संपदा: संचित (इकट्ठा किया हुआ), मानस (मन), तेजस्वी (प्रभावशाली), ठसक (ऐंठ, शान), रसद (अनाज, राशन), दाद देना (सही तारीफ़ करना), साक्षी (गवाह)।
लांछित (कलंकित), हँडिया (मिट्टी का बर्तन), सुतली (रेशों से बटी डोरी), चौपाल (गाँव की बैठक जहाँ लोग इकट्ठे होकर बात करते हैं), सघन (घना), तरेड़ (दरार), ज़ीना (सीढ़ी)।
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