LearnWave
Learn it. Master it.

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

स्वयंवर, सत्य का साहस और मंचन

स्वयंवर के बारे में जानिए और सच बोलने के साहस पर विचार कीजिए।

स्वयंवर: पुराने भारत में कन्या खुद वर चुनती थी, अक्सर किसी कठिन शर्त के साथ। सीता के लिए शर्त थी शिव का धनुष उठाना और चढ़ाना।

और स्वयंवर: द्रौपदी के स्वयंवर में घूमते लक्ष्य (मछली की आँख) को भेदना था; ब्राह्मण के वेश में अर्जुन सफल हुए। दमयंती ने भी स्वयंवर में नल को चुना।

आज के लिए सीख. राम के गुण (विनम्रता, मर्यादा, धैर्य) किसी नेता, शासक या कप्तान के लिए ज़रूरी हैं: झगड़ा सुलझाना, हार में शांत रहना, अपनी गलती मानना। संकट में उनका धैर्य और विनम्रता सबसे ज़्यादा दिखती है।

परिचय देने का ढंग (जैसे सभा में राजा देते हैं): सच्चा, छोटा और विनम्र: नाम, कक्षा, रुचियाँ, एक गुण, और एक कमज़ोरी जिस पर आप काम कर रहे हैं। बढ़ा-चढ़ाकर अपनी तारीफ़ करना अच्छा परिचय नहीं है।

मंचन (रामलीला या कठपुतली में यह प्रसंग खूब खेला जाता है): ध्वनि (परशुराम के आने पर नगाड़े की तेज़ थाप), भाव (क्रोध, व्यंग्य, शांति), संगीत, और वेशभूषा (फरसा, जटाएँ)। और एक सीख: सच कहने का साहस ज़रूरी है; लक्ष्मण निडर हैं, राम भी सच नहीं छिपाते पर विनम्र रहते हैं। साहस और विनम्रता का मेल सबसे असरदार है।

पुरानी कथा, आज की सीख: साहस भी चाहिए और विनम्रता भी।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.