LearnWave
Learn it. Master it.

मन्नू भंडारी — एक कहानी यह भी

माँ, बचपन और मोहल्ला

बचपन के परिवेश और पड़ोस-संस्कृति के महत्त्व पर विचार करना।

माँ. माँ अनपढ़ थीं, पर धरती से भी ज़्यादा सहनशील। सुबह से शाम तक सबकी इच्छाएँ और पिता जी की आज्ञाएँ पूरी करतीं; पिता जी की हर ज़्यादती को अपना भाग्य और बच्चों की हर ज़िद को अपना फ़र्ज़ समझकर चुपचाप सहतीं। उन्होंने कभी अपने लिए कुछ नहीं माँगा।

आदर्श नहीं बन सकीं. बच्चों को माँ से गहरा लगाव था। पर लेखिका कहती हैं: उनका असहाय (बेबस) त्याग और सहनशीलता उनका आदर्श नहीं बन सकी। वे वैसा नहीं बनना चाहती थीं।

बचपन के खेल. पाँच भाई-बहनों में मन्नू सबसे छोटी थीं। बड़ी बहन सुशीला के साथ आँगन में खेले: सतोलिया, लँगड़ी-टाँग, पकड़म-पकड़ाई, काली-टीलो; कमरों में गुड्डे-गुड़ियों के ब्याह। भाइयों के साथ गिल्ली-डंडा और पतंग भी। पर लड़कियों की दुनिया घर की चारदीवारी तक सीमित थी।

पूरा मोहल्ला एक घर. उन दिनों 'घर' की दीवारें पूरे मोहल्ले तक फैली थीं; पड़ोस के घर अपने जैसे थे। कुछ पड़ोसी तो बिल्कुल अपने परिवार जैसे थे। लेखिका की कई शुरुआती कहानियों के पात्र इसी मोहल्ले से आए।

पड़ोस-कल्चर का खोना. आज बड़े शहरों के फ़्लैटों में लोग अपने में सिमट गए हैं, पड़ोसियों से कटे हुए। लेखिका कहती हैं: इससे लोग संकुचित, असहाय और असुरक्षित हो गए हैं।

आपकी बारी. आज लड़कियों की स्थिति क्या वैसी ही है, या बदल गई है? और आपके मोहल्ले में पड़ोसियों से कैसा रिश्ता है? अपने अनुभव से लिखिए।

सहनशील माँ, आँगन के खेल और परिवार जैसा मोहल्ला: पर आज का फ़्लैट-जीवन पड़ोस से काटता है।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.