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मातृभूमि

भूमि से जुड़े महापुरुष

कविता का दूसरा भाग पढ़ो और जानो कि इस भूमि से कौन-कौन से महापुरुष जुड़े हैं।

अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 2 खोलो और कविता 'मातृभूमि' का दूसरा हिस्सा फिर से पढ़ो। पहले हिस्से में कवि ने भारत की प्रकृति की प्रशंसा की थी। इस हिस्से में वह बताता है कि यह भूमि किन महापुरुषों से जुड़ी है।

कवि कहता है कि यह वही भूमि है जहाँ रघुपति — यानी श्रीराम — जन्मे थे, और जहाँ सीता जन्मी थीं। यहीं श्रीकृष्ण ने अपनी वंशी (बाँसुरी) की तान सुनाई और पुनीत (पवित्र) गीता सुनाई।

फिर कवि गौतम की बात करता है। गौतम ने इसी भूमि पर जन्म लेकर इसका सुयश और बढ़ा दिया। 'सुयश' दो हिस्सों से बना है: 'सु' यानी अच्छा, और 'यश' यानी नाम या प्रसिद्धि। उन्होंने सारे जग (संसार) को दया सिखाई और जग को दिया (दीपक) दिखाया। यह दिया ज्ञान का दीपक है — यानी अँधेरे में, अज्ञान में, राह दिखाई।

ध्यान दो: 'दया' और 'दिया' सुनने में मिलते-जुलते हैं, पर अर्थ अलग है। दया = दूसरों के दुख को समझकर उनकी मदद करना; दिया = दीपक।

इसीलिए कवि इस भूमि को अपनी धर्मभूमि, कर्मभूमि, युद्ध-भूमि और बुद्ध-भूमि भी कहता है। युद्ध-भूमि यानी वीरों की धरती, और बुद्ध-भूमि यानी ज्ञान और शांति की धरती: यहाँ साहस भी है और समझदारी भी। वह गर्व से कहता है कि यह मेरी जन्मभूमि है, यह मेरी मातृभूमि है।

युद्ध-भूमि भी, बुद्ध-भूमि भी — कवि के भारत में वीरता और ज्ञान साथ-साथ हैं।

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