मातृभूमि
पंक्ति और भाव
कविता की पंक्तियों को उनके सही भाव से मिलाओ।
अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 6 खोलो। वहाँ 'मिलान' की तालिका में कविता 'मातृभूमि' के तीन हिस्से हैं, और हर हिस्से के सामने उसका मिलता-जुलता भाव लिखना है। भाव का मतलब है — कवि असल में क्या कहना चाहता है।
पहला हिस्सा वह है जहाँ कवि इस भूमि को अपनी 'जन्मभूमि' और 'मातृभूमि' कहता है। 'जन्मभूमि' यानी जन्म की भूमि, और 'मातृभूमि' में 'मातृ' का अर्थ है माता। तो इसका भाव है: मैंने उस भूमि पर जन्म लिया है, और वह भूमि मेरी माँ के समान है।
दूसरा हिस्सा वह है जहाँ चिड़ियाँ मस्त होकर झाड़ियों में चहक रही हैं। चिड़ियाँ तभी खुशी से गाती हैं जब मौसम अच्छा हो। इसका भाव है: वहाँ की जलवायु इतनी सुखदायी है कि पक्षी पेड़-पौधों के बीच प्रसन्नता से गीत गा रहे हैं।
तीसरा हिस्सा वह है जहाँ अमराइयाँ घनी हैं और कोयल पुकारती है। 'अमराई' आम के बाग को कहते हैं। इसका भाव है: यहाँ आम के घने उद्यान (बाग) हैं, जिनमें कोयल जैसे पक्षी चहचहा रहे हैं।
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