परीक्षा
किसान की गाड़ी
पढ़ो कि कीचड़ में फँसी किसान की गाड़ी के पास क्या हुआ।
यह बात आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 10 'परीक्षा' (प्रेमचंद) के तीसरे और चौथे भाग की है। एक दिन नए फ़ैशन वाले उम्मीदवारों ने तय किया कि आपस में हॉकी का खेल हो जाए। देवगढ़ में यह बिल्कुल अनोखी बात थी — वहाँ पढ़े-लिखे लोग शतरंज और ताश जैसे 'गंभीर' खेल खेलते थे, और दौड़-कूद के खेल बच्चों के खेल माने जाते थे।
खेल बड़े उत्साह से शाम तक चलता रहा। सब पसीने से तर हो गए, हाँफते-हाँफते थक गए, पर हार-जीत का फ़ैसला नहीं हुआ। अँधेरा हो चला था। मैदान से थोड़ी दूर एक नाला था, जिस पर कोई पुल नहीं था। उसी समय एक किसान अनाज से भरी बैलगाड़ी लेकर उस नाले में आया। नाले में कीचड़ था और उसकी चढ़ाई बहुत ऊँची थी। बोझ ज़्यादा था और बैल कमज़ोर — गाड़ी ऊपर चढ़ ही नहीं पाती थी। बेचारा किसान इधर-उधर देखता, पर कोई मदद करने वाला नहीं दिखता।
तभी खिलाड़ी हाथों में डंडे लिए उधर से निकले। किसान ने उन्हें डरी-सहमी आँखों से देखा, पर मदद माँगने की हिम्मत नहीं हुई। खिलाड़ियों ने भी उसे देखा, पर ऐसी आँखों से जिनमें कोई सहानुभूति नहीं थी। वे आगे निकल गए।
पर उसी समूह में एक युवक था जिसके हृदय में दया भी थी और साहस भी। खेलते हुए उसके पैर में चोट लग गई थी, और वह लँगड़ाता हुआ धीरे-धीरे आ रहा था। गाड़ी देखते ही वह रुक गया। उसने अपना डंडा एक किनारे रखा, कोट उतारा और किसान से बोला कि मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ। किसान गाड़ी पर बैठकर बैलों को सँभालने लगा, और युवक ने पहिये को पूरे ज़ोर से धकेला। वह घुटने तक कीचड़ में धँस गया, पर उसने हिम्मत नहीं हारी — और गाड़ी नाले के ऊपर चढ़ गई!
किसान ने हाथ जोड़कर धन्यवाद दिया। युवक ने हँसकर पूछा — कुछ इनाम दोगे? किसान ने गंभीर होकर कहा कि नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी। युवक ने ध्यान से देखा — आवाज़ और चेहरा वही — उसे संदेह हुआ कि कहीं यह सुजानसिंह तो नहीं! किसान ने उसका संदेह भाँप लिया और मुसकराकर बोला, 'गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।'
Practise this lesson
Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.
No account, no email address. Opens the real product.