रहीम के दोहे
पेड़ और सरोवर
पेड़ और सरोवर वाला दोहा पढ़ो और समझो।
अपनी किताब 'मल्हार' का पृष्ठ 45 खोलो और पाठ 5 'रहीम के दोहे' का दूसरा दोहा पढ़ो — वह दोहा जिसमें पेड़ (तरुवर) और सरोवर (सरवर, यानी तालाब) की बात है।
इस दोहे में रहीम प्रकृति से एक बात दिखाते हैं। पेड़ अपने फल खुद नहीं खाते — उनके फल दूसरे खाते हैं। सरोवर अपना पानी खुद नहीं पीते — उनका पानी दूसरे पीते हैं। पेड़ और सरोवर जो कुछ इकट्ठा करते हैं, वह दूसरों के काम आता है।
फिर रहीम कहते हैं कि सज्जन (अच्छे और समझदार लोग, जिन्हें दोहे में 'सुजान' कहा गया है) भी ऐसे ही होते हैं। वे जो संपत्ति (धन) इकट्ठा करते हैं, वह दूसरों की भलाई (परहित) के लिए ही करते हैं।
ध्यान दो कि दोहा पहले दो उदाहरण देता है (पेड़ और सरोवर), फिर अपनी बात कहता है (सज्जन भी ऐसे ही होते हैं)। उदाहरण से बात आसानी से समझ में आ जाती है और याद भी रहती है।
दूसरों की भलाई करने के गुण को परोपकार कहते हैं। इस दोहे में प्रकृति — पेड़ और सरोवर — के उदाहरण से मनुष्य को परोपकार का गुण सिखाया गया है। जब हम यह सीख अपनाते हैं, तो मन से लोभ (लालच) घटता है।
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