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मेरी माँ

वर्ग पहेली के विशेषण

वर्ग पहेली में छिपे विशेषण खोजो।

आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 6 'मेरी माँ' के अंत में, पृष्ठ 59 पर, एक वर्ग पहेली है। यह छह पंक्तियों और छह स्तंभों (खानों की खड़ी कतारों) का एक वर्ग है, जिसके हर खाने में एक अक्षर है। इसमें पाठ के बारह विशेषण छिपे हैं। (याद करो: विशेषण वे शब्द हैं जो किसी की विशेषता या गुण बताते हैं।)

कुछ विशेषण बाएँ से दाएँ पढ़ने पर मिलते हैं। जैसे पहली पंक्ति के अक्षर हैं — मं, ग, ल, म, यी, ल। इनमें पहले पाँच अक्षर मिलकर बनाते हैं 'मंगलमयी'। इसी तरह पंक्तियों में प्रत्येक, छोटी, ग्यारह, खूब, साधारण, दुखभरी, महान और स्वाधीन छिपे हैं।

कुछ विशेषण ऊपर से नीचे पढ़ने पर मिलते हैं। जैसे छठे (आखिरी) स्तंभ में ऊपर से नीचे अक्षर हैं — ल, टी, ब, ड़ा, प, न। इनमें 'ब' और 'ड़ा' मिलकर बनाते हैं 'बड़ा'। इसी तरह स्तंभों में धार्मिक और मनोहर भी छिपे हैं।

ये सभी शब्द पाठ में आए हैं। जैसे: माँ की 'मंगलमयी' मूर्ति, 'प्रत्येक' घटना, 'ग्यारह' वर्ष की उम्र, 'अति साधारण' मनुष्य, 'धार्मिक' जीवन, 'मनोहर' रूप, दादीजी की 'छोटी' बहन, 'खूब' बातचीत, माँ का सबसे 'बड़ा' आदेश, मृत्यु की 'दुखभरी' खबर, 'महान' से महान संकट और 'स्वाधीन' भारत।

तो बारह विशेषण हैं: मंगलमयी, प्रत्येक, ग्यारह, साधारण, धार्मिक, मनोहर, छोटी, खूब, बड़ा, दुखभरी, महान और स्वाधीन।

पाठ की वर्ग पहेली में बारह विशेषण छिपे हैं — मंगलमयी, प्रत्येक, ग्यारह, साधारण, धार्मिक, मनोहर, छोटी, खूब, बड़ा, दुखभरी, महान और स्वाधीन — कुछ बाएँ से दाएँ और कुछ ऊपर से नीचे।

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