LearnWave
Learn it. Master it.

मेरी माँ

माँ का सबसे बड़ा आदेश

पढ़ो कि माँ ने बिस्मिल को सबसे बड़ा आदेश क्या दिया।

यह पाठ आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 6 'मेरी माँ' से है। इसमें बिस्मिल बताते हैं कि उनकी माँ का स्वभाव कैसा था और उनका सबसे बड़ा आदेश क्या था।

माताजी का सबसे बड़ा आदेश यह था कि किसी की प्राणहानि न हो — यानी किसी की जान न जाए। वे कहती थीं कि अपने शत्रु (दुश्मन) को भी कभी प्राणदंड (मौत की सज़ा) न देना। बिस्मिल लिखते हैं कि माँ के इस आदेश को पूरा करने के लिए उन्हें मजबूरी में एक-दो बार अपनी प्रतिज्ञा (वचन) भी तोड़नी पड़ी थी।

माताजी क्रोध से नहीं, प्रेम से समझाती थीं। अगर उन्हें बिस्मिल को डाँटना भी होता, तो वे बड़े स्नेह (प्यार) से हर बात समझा देतीं। अगर बिस्मिल कभी उलटा-सीधा जवाब दे देते, तब भी वे प्रेम भरे शब्दों में कहतीं — तुम्हें जो अच्छा लगे वह करो, पर ऐसा करना ठीक नहीं, इसका परिणाम अच्छा नहीं होगा।

पढ़ाई-लिखाई के अलावा क्रांतिकारी जीवन में भी माताजी ने बिस्मिल की वैसी ही सहायता की, जैसी इटली के नेता मेजिनी की सहायता उनकी माता ने की थी।

जब बिस्मिल आर्यसमाज में आए, तो माँ-बेटे में खूब बातचीत होती। बिस्मिल लिखते हैं कि पहले की तुलना में अब माताजी के विचार भी कुछ उदार (खुले, बड़े मन वाले) हो गए थे।

माताजी का सबसे बड़ा आदेश था कि किसी के प्राण न लिए जाएँ — शत्रु को भी प्राणदंड न देना; वे क्रोध के बजाय स्नेह से समझाती थीं, क्रांतिकारी जीवन में मेजिनी की माँ की तरह बेटे की सहायता करती थीं, और उनके विचार उदार थे।

Practise this lesson

Questions that get harder as you improve, a Tutor that helps without giving the answer away, and progress you can see. Free for every learner.

No account, no email address. Opens the real product.