सत्रिया और बिहू नृत्य
सत्र और अनु
सत्र क्या होता है, यह जानो और अनु से मिलो।
यह हिस्सा आपकी किताब 'मल्हार' के पाठ 8 'सत्रिया और बिहू नृत्य' का है। बिहू देखने के अगले दिन एंजेला का परिवार उत्तरी असम की ओर चला।
उत्तरी असम 'सत्रों' की पीठ (केंद्र) है। 'सत्र' यानी मठ — वह जगह जहाँ साधु रहते, पूजा करते और सीखते-सिखाते हैं। सत्रिया नृत्य का नाम इसी 'सत्र' से बना है, क्योंकि यह नृत्य सत्रों में ही जन्मा। (इसे 'क्षत्रिय' मत पढ़ना!) परिवार को एक सत्र के पास रहकर सत्रिया नृत्य का फ़िल्मांकन करना था। जब वे 'दक्षिणापथ सत्र' पहुँचे, तो वहाँ उनकी मुलाकात रीना सेन से हुई, जो असम की एक जानी-मानी लेखिका हैं। उस हफ़्ते उन्हें रीना सेन के घर पर ही रुकना था।
रीना आंटी की एक बिटिया (बेटी) थी — अनु। अनु और एंजेला ने तुरंत एक-दूसरे की तरफ़ देखा, क्योंकि दोनों की उम्र एक जैसी थी — दस साल। दोनों ने अंग्रेज़ी में बातचीत शुरू की, और अनु ने एंजेला को कुछ असमिया शब्द भी सिखाए।
एंजेला को अनु के खिलौने बहुत अच्छे लगे, जो थोड़े अलग तरह के थे — गुड़िया, लकड़ी के खिलौने और नारियल की जटा से बने घर। उसने लंदन में ऐसे खिलौने कभी नहीं देखे थे। अनु का सबसे पसंदीदा खिलौना था लकड़ी का तीर-कमान। उसे लेकर अनु को राम बनना अच्छा लगता था, और एंजेला बनती थी उसका विरोधी — शक्तिशाली रावण। दोनों साथ खेलते तो उनकी उछल-कूद और नकली लड़ाई खत्म ही नहीं होती थी!
ध्यान दो: किसी नई जगह पर अपनी ही उम्र का कोई मिल जाए, तो दोस्ती कितनी जल्दी हो जाती है! अलग देश, अलग भाषा, अलग खिलौने — फिर भी दोनों सहेलियाँ खेल में एक हो गईं।
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