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मैया मैं नहिं माखन खायो

पद के नाम और चीज़ें

पद में आए नाम और चीज़ें पहचानो।

सूरदास के पद 'मैया मैं नहिं माखन खायो' (किताब 'मल्हार', पृष्ठ 94) में कुछ नाम और चीज़ें आती हैं जो आज हम रोज़ नहीं सुनते। पृष्ठ 97 पर किताब ने इन्हें उनके अर्थ या संदर्भ से मिलाने को दिया है। आओ, एक-एक करके समझें।

'जसोदा' यशोदा हैं — श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने उन्हें पाला था। 'माता' का अर्थ है जन्म देने वाली, जननी, माँ। 'ग्वाल-बाल' गाय पालने वालों के बच्चे हैं — श्रीकृष्ण के संगी-साथी।

'मधुबन' मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वन है। 'बंसीवट' एक वट (बरगद) का पेड़ है। मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराते थे, तब इसी पेड़ पर चढ़कर वंशी (बाँसुरी) बजाते और उसकी ध्वनि से गायों को पुकारकर इकट्ठा करते थे।

'छीको' (छीका) रस्सियों का बुना एक गोल जाल है, जिसे छत या किसी ऊँची जगह से लटकाया जाता है। उसमें दूध, दही जैसी चीज़ें रखी जाती हैं ताकि कुत्ते-बिल्ली उन्हें न पा सकें। इसीलिए कृष्ण कहते हैं कि वे छीके तक पहुँच ही नहीं सकते!

'लकुटि कमरिया' का अर्थ है लाठी और छोटा कंबल (कमली) — मान्यता है कि श्रीकृष्ण इन्हें लेकर गाय चराने जाते थे। और 'पहर' समय मापने की एक इकाई है: तीन घंटे का एक पहर होता है, और एक दिवस में आठ पहर होते हैं।

पद के नाम और चीज़ें उस समय के ब्रज के जीवन से जुड़ी हैं: जसोदा (कृष्ण की माँ), ग्वाल-बाल (साथी), मधुबन (वन), बंसीवट (वट का पेड़), छीको (लटकता जाल), लकुटि कमरिया (लाठी-कंबल) और पहर (तीन घंटे)।

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